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  Maniupur :- मणिपुर, हमारा मणिपूर, सेवन सिस्टर्स कहे जाने वाला हमारा अपना मणिपुर, जो भारत ही है, जहां के लोग कहते है "हम भी भारत" आज मणिपुर की ये घटना चीख चीख कर ये बयां कर रही है की, देश आज किन हाथों में है/ देश की दुर्दशा बत्तर से भी परे है/ जिस भारत की कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी, आज शायद वो होते तो अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देते, और मिडिया के सामने ये कहते की "हम देश चलाने के काबिल नही है"  आज के इस वैज्ञानिक युग में विज्ञान से ज्यादा भारत देश में निचली जातियों के साथ घट रही घटनाएं घटना, महिलाओं के साथ बर्बरता, मध्य प्रदेश में मूत्र प्रायश्चि, उत्तर प्रदेश में परिवार के अनुपस्थिति में दाह संस्कार करना,उत्तर प्रदेश में दूल्हे की बारात रोकना आदि आदि नाना प्रकार के आविष्कार हमारे भारत देश में हो रहे है/ जहां एक ओर विश्व के सभी छोटे - बड़े देश अपने अविष्कारों की दुनिया में नए - नए किर्तिमान रच रहे हैं, वही भारत देश विश्व गुरु बनने के कगार पर खड़ा है/ आज यदी किसी शहर में बारिश हो जाए तो ये पता लगाना मुश्किल होगा की पानी शहर में घुस गया है या शहर...

हैंडसम लुक

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आज के इस नए दौर में हर कोई अपने आप को सुंदर या इंग्लिश में कहे तो हैंडसम दिखाना चाहता है/ इस लिए खास करके नवयुवक एवं नव युवतियां इंटरनेट वेबसाइटों का एवं सोशल नेटवर्किंग साइट्स से यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, इन सारी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के अलावा भी कई ऐसे वेबसाइट इंटरनेट पर उपलब्ध है इन के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर अपने आप को सुंदर बनाने की कोशिश करते हैं चाहे वह अच्छे कपड़े हो जूते हो गॉगल या हीरो की स्टाइल में बाल कटवाए हो या फिर अपने स्टाइल से अच्छा इंप्रेशन दिखाने की कोशिश करते हैं कई लोग तो इस हद तक जाते हैं की अपने आप को फेमस करने के लिए नई नई चीजों का प्रयोग करके देखते हैं जिसका परिणाम कई बार अच्छा भी होता है एवं बुरा भी होता है लेकिन कहीं ना कहीं यह नया वर्ग अपनी वास्तविकता से भटक रहा है एवं अपने मूल कर्तव्य को भूल रहा है पारिवारिक स्थिति एवं दशा को कई लोग जाने अनजाने में भूल रहे हैं परिणाम स्वरूप उन्हें बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान बहन करना पड़ता है आज के इस दौड़ती दुनिया में इन चीजों का महत्व भी उतना ही बड़ा है जितना कि खाने के लिए भोजन आज ...

कोरोना वायरस के दौर में बेरोजगारी

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भारत में कोरोना वायरस ने ना केवल सेहत बल्कि जेब पर भी कहर बरपाना शुरू कर दिया है. इसकी वजह से लाखों-करोड़ों लोगों की नौकरियां जा रही हैं और कोई कुछ नहीं कर पा रहा. सरकार ने कहा था कि कंपनियां अपने यहां काम करने वाले लोगों को ना निकाले , तनख्वाह ना काटे , लेकिन ये निर्देश धरे के धरे रह गए हैं. इसलिए ये सवाल उठ रहा है कि कोरोना जब तक काबू आएगा कितने लोग बेरोज़गार हो चुके होंगे. कोरोना वायरस के प्रसार के साथ ही लगभग हर हफ्ते किसी न किसी क्षेत्र से हजारों कर्मचारियों को बिना वेतन के छुट्टी देने , नौकरियों से निकालने , वेतन में भारी कटौती की खबरें आ रही हैं.   माल्स , रेस्तरां , बार , होटल सब बंद हैं , विमान सेवाओं और अन्य आवाजही के साधनों पर रोक लगी हुई है. फ़ैक्टरियां , कारखाने सभी ठप पड़े हैं.  ऐसे में संस्थान लगातार लोगों की छंटनी कर रहे हैं और हर कोई इसी डर के साये में जी रहा है कि न जाने कब उसकी नौकरी चली जाए.  इसके अलावा स्वरोजगार में लगे लोग , छोटे-मोटे काम धंधे करके परिवार चलाने वाले लोग सभी घर में बैठे हैं और उनकी आमदनी का कोई स्रोत नहीं है.  बॉस्टन कॉलेज में...